भूतेश्वर महादेव मंदिर पर सुबह से लगी भक्तों की कतारें, दिनभर जुटा रहा मेला
भूतेश्वर महादेव मंदिर पर सुबह से लगी भक्तों की कतारें, दिनभर
जुटा रहा मेला
, शाम को संगीत से हुई भोले बाबा की आराधना
रात्रि में शुरू हुई चारों प्रहर की आराधना में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु – सुश्रृंगारित भूतेश्वर महादेव पर निभाई गई बरसों की परम्परा
इन्दौर। शहर के पश्चिम क्षेत्र, पंचकुइया स्थित श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर पर रविवार को अल सुबह से भक्तों की कतारें लगने लगी थीं। दिनभर मंदिर पर भक्तों का मेला लगा रहा। होलकर शासनकाल में स्थापित इस मंदिर में शाम को शास्त्रीय संगीत के माध्यम से 88 वर्ष पुरानी परम्परा का निर्वाह करते हुए शहर के शास्त्रीय संगीत गायकों और संगीत कलाकारों ने अपनी साधना से भोले बाबा की आराधना तो की ही, हजारों भक्तों को भी मंत्रमुग्ध बनाए रखा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक विशिष्ट मेहमानों ने भी भूतेश्वर महादेव की पूजा अर्चना कर शहर में सुख, शांति और सद्भाव की प्रार्थना की। मंदिर पर चारों प्रहर पूजा भी प्रारंभ हुई जो सुबह तक चलेगी।
मंदिर के मुख्य पुजारी पं. श्री हरीशानंद तिवारी एवं आचार्य पं. यतीन्द्र तिवारी ने बताया कि अन्य मन्दिरों में जहां भगवान के विवाह आदि की रस्में निभाई जाती हैं, वहीँ यह शहर का ऐसा एकमात्र मन्दिर है जहां शास्त्रों में वर्णित महाशिवरात्रि का स्वरुप और अधिक व्यापक एवं गंभीर माना गया। माना जाता है कि इसी रात्रि को अनंत ज्योति स्तम्भ के रूप में शिव का प्राकट्य हुआ। मंदिर पर चारों प्रहर पूजा का विधान है लिहाजा रविवार को प्रथम प्रहर में जलाभिषेक, द्वितीय प्रहर में दुग्धाभिषेक, तृतीय प्रहर में घृताभिषेक और चतुर्थ प्रहर में शहद और बिल्व पत्र का अर्पण किया गया। जलाभिषेक अहंकार और बाहरी मलीनताओं को धोने, दुग्धाभिषेक मन और चित्त की शुद्धि, घृताभिषेक साधक के भीतर तेज और स्थिरता का संचार करने तथा शहद और बिल्व पत्र के अर्पण से आनंद, समर्पण और पूर्णता का लक्ष्य माना जाता है।
संध्या को यहाँ शास्त्रीय संगीत निशा का आयोजन हुआ जिसमें विदुषी शोभा चौधरी ने शास्त्रीय गायन किया। तबले पर संगत मुकेश रासगाय और हारमोनियम पर राजेंद्र जोशी ने की। इसी तरह ब्रजमोहन भमरेले ने वायलिन वादन से भगवान शिव की आराधना की। तबले पर संगत गांधार राजहंस ने की। इस अवसर पर प्रख्यात तबला वादक पं. दिनेश शुक्ल एवं सारंग लासुरकर ने भी अपनी-अपनी एकल प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। सभी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों का श्रीगणेश भगवान शिव की वन्दना के साथ किया। कलाकारों का स्वागत आचार्य पं. यतीन्द्र तिवारी एवं मंदिर से जुड़े भक्तों ने किया। इसके पूर्व सुबह 3 बजे मुहूर्त आरती के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना का क्रम प्रारंभ हुआ। रात्रि 12 बजे महानिशा पूजन एवं आरती तथा रात 12.30 बजे भक्ति गीत के साथ हजारों भक्तों ने रात्रि जागरण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना में अपने गीत, भजन और संकीर्तन प्रस्तुत किए। प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ।



